मत छेडिये

Author: kapil sharma / Labels:

मत छेडिये, रहने दीजिये
जो राख सी जमी हैं शोलों पर
ना फूंक भरे, मत हवा दीजिये
इस ज़ेहन का सूनापन
इक गुबार से भर जायेगा
फिर सन्नाटे को तरसते
उम्र सा लम्बा,  लम्हा लग जायेगा
रोग पुराना है, दवाएं हैं बेअसर
रहम करिए, मौत की दुआ दीजिये
मत छेडिये, रहने दीजिये
जो राख सी जमी हैं शोलों पर
ना फूंक भरे, मत हवा दीजिये

14 comments:

Aditya said...

//रोग पुराना है, दवाएं हैं बेअसर
रहम करिए, मौत की दुआ दीजिये

waah sirji waah.. kya khayaal hai..
bahut khoob.. :)

induravisinghj said...

फिर सन्नाटे को तरसते
उम्र सा लम्बा, लम्हा लग जायेगा
bahut khoob,sunder rachna...

NUKTAA said...

Pasandgi ke shukriya Aditya bhai

NUKTAA said...

Rachna pasand karne ke liye shukriya Induji

Seema said...

Bahut hi sunder.

NUKTAA said...

bahut bahut aabhari hun seemaji

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

सुन्दर! अनुरोध का आदर होना चाहिये!

NUKTAA said...

Smart Indian:- Sirji Aabhari hun :)

Meera Ganesh said...

Bahut badhiyaa...bahut badhiyaa. Waah!!

NUKTAA said...

Thanks Meeraji

Monika Jain "मिष्ठी" said...

bahut khoob :)

NUKTAA said...

thnx Mishti :)

Dr.Shaizi said...

इस जहाँ का सूनापन
इक ग़ुबार से भर जाएगा
फिर सन्नाटे को तरसते
उम्र सा लंबा,लम्हा लग जाएगा...
बहुत खूब...
एक यथार्थ की सुंदर अभिव्यक्ति...

NUKTAA said...

Shukriya, Shaizi

अंतर्मन