लम्हे सा लम्बा युग

Author: kapil sharma / Labels:

लम्हे सा लम्बा युग
कौंध गया क्षण में
आँखों के आगे से
ये अभी कौन गया?    

4 comments:

induravisinghj said...

superb...

NUKTAA said...

thank you :)

पुरुषोत्तम पाण्डेय said...

ये अनुभूति सब को नसीब नहीं हो सकती है.

NUKTAA said...

dhanywaad sirji

अंतर्मन