ए ख्वाब

Author: kapil sharma / Labels:

जब भी सुबह
अलसाकर पलकें खोलता हूँ
ए ख्वाब, तुझे 
उस करवट लेटा देखकर
बेसबब बेवजा ही
मुस्कुरा देता हूँ

यूँ मिलने जहान की,
दौड़ धुप से
घर से कदम बाहर डालता हूँ
ए ख्वाब, तेरी आँखों 
दुआ ए खैरियत देखकर
बेसबब बेवजा ही
मुस्कुरा देता हूँ

पहलु में रात
के जो कुफ्र सबाब से परे
फिर तूझी में सुकूं तलाशता हूँ
ए ख्वाब तुझे
खुद पर चादर सा ओढ़कर
बेसबब बेवजा ही
मुस्कुरा देता हूँ
 
 
 

कौन शक्स उस जगह मिला?

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मुझे तेरी फुरकत का
अजब तजुर्बा मिला
गर तू नहीं था तो
कौन शक्स उस जगह मिला?

चाल मुकद्दर की, कब,
किसको समझ आई हैं,
क्यों जुदा हुए हैं, कोई किसे,
किस वजह मिला?

बामौत के दावों पर
यकीन मुझको नहीं हैं
जिसका जैसा नसीब,
सब उसको यहाँ मिला

सजदा ए पाक में "नुक्ता",
ये ऐब सा रहा,
बेवजू रही नजर मेरी,
वो बनकर खुदा मिला

"प्रेम", तुमने एक क्षण में

Author: kapil sharma / Labels:

मदिरालय औ' देवालय का
अंतर सहज मिटा दिया
"प्रेम", तुमने एक क्षण में
क्या से क्या बना दिया?

 देव मधु प्रसाद चखें 
मदिरालय से पंचमृत बहें
 एक रंग,एक आनंद
ये पाठ कैसा पढ़ा दिया
"प्रेम", तुमने एक क्षण में
क्या से क्या बना दिया?

कृष्ण पक्ष या शुक्ल पक्ष हो
भेद तुमको ज्ञात नहीं
अन्तराल में गतिमान चन्द्र को
प्रियतम का अहोदा दिया
"प्रेम", तुमने एक क्षण में
क्या से क्या बना दिया?

रचा तुमको रचेता ने
या रचनाकार तुमने रचा?
कैसे, कैसे प्रश्नों का
उत्तर कहाँ छिपा दिया

"प्रेम", तुमने एक क्षण में
क्या से क्या बना दिया?
 
 

अंतर्मन