विस्मृत कुछ यादें

Author: kapil sharma / Labels:

विस्मृत कुछ यादें
उन पगडंडियों पर
छितरी छितरी 
शत आभार
हे वसुंधरा
जो याद कराया
भूमि पुत्र हूँ मैं
    

तेरी जात क्या है?

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रौशन तुझसे, 
मैकदे, कब्रें, 
शिवाले सब
लौ ए शम्मा 
तेरी जात क्या है?
 

इश्क

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इश्क, अजब दर्द की बेहया दास्ताँ
रेजां रेजां लम्हों का, नातमाम बयाँ

अंतर्मन