विस्मृत कुछ यादें

Author: kapil sharma / Labels:

विस्मृत कुछ यादें
उन पगडंडियों पर
छितरी छितरी 
शत आभार
हे वसुंधरा
जो याद कराया
भूमि पुत्र हूँ मैं
    

अंतर्मन