तेरे लबों का छु लेना

Author: kapil sharma / Labels:

तेरे लबों का छु लेना
नसीब अगर होता
 मेरे लफ़्ज़ों में
दुआओं सा असर होता
ये ज़िन्दगी भी 
रूमानी हो ही जाती
एक दिन जो मौत की तरह
जीने का भी मुकर्रर होता
वादा झूठा ही सही 
कर तो जाते 
नादान इस दिल को
एक क़यामत तक
और सबर होता
 
  

2 comments:

nidhi said...

woowwwwwwwww awesomeeeeeeee

NUKTAA said...

Thank You :)

अंतर्मन