हाय रे बामन

Author: kapil sharma / Labels:

हाय रे बामन,
तुने मुझसे जाने कितीनी पूजा खा ली?
कितने मुझसे मंत्र पढाये?
किन किन के जाप रटाये?
जाने कितने पाप कराये?
हाय रे बामन,
कैसे कैसे रस्ते से तू,
परलोक के स्वप्न दिखलाये
पाप पुन्य का लेखा झोका
बनिए सा बखाये.
हाय रे बामन,

0 comments:

अंतर्मन