पुराने कुछ अशआर मिले

Author: kapil sharma / Labels:

वर्खों में क़ैद इस तरह पुराने  कुछ अशआर मिले,
बरसों बाद, ज्यूँ, नाराजगी लिए दो यार मिले


चल ढूँढते हैं मिलकर लफ्ज़ नया जुदाई को,
बिछड़ते हुए लबों पे झिझक न इस बार मिले


वादे पर तेरे ऐतबार कर भी ले लेकिन,
इक और ज़िन्दगी का, फिरसे न इंतज़ार मिले


चाँद तलाशते जब भी नज़रों ने आसमान देखा
खुशफेहमियाँ बेचते, बस इश्तेहार मिले

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अंतर्मन