त्रिवेणी

Author: kapil sharma / Labels:

अखबार की कतरनों सी यादें
धुल चढ़े अलबमों में दबी रहती,

नाशुक्रा तूफ़ान जो घर से ना गुजरता
____________________________________________

यकीन दिल को भी आ जाये,
सब भूल गए हो तुम,

फेसबुक पर तस्वीरों  को like करना जो छोड़ो तुम
  
____________________________________________

सच ही कहा था तुमने, ज़िन्दगी हँसीमजाक में कट जाएगी
तुम सबके चेहरे की हँसी बन गए
...मैं सबकी ज़िन्दगी का मजाक
____________________________________________

दुआ, अदा, हया, शमा
वो मुस्कुराते रहे

नजर के रंग बदलते रहे
____________________________________________

3 comments:

मनोज कुमार said...

अच्छी त्रिवेणियां।

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा!!

NUKTAA said...

धन्यवाद आप दोनों का :)

अंतर्मन