शहर

Author: kapil sharma / Labels:

इस जाने पहचाने शहर के कई हिस्से,

जिनसे मेरे मरासिम ऐसे नहीं थे
अब मुझे गले लगाने दौड़ते है
जिन कुचों में मैं पहले नहीं गया
अब देख मुझे, एक तबस्सुम सी,
बेवजा चेहरे पे सज़ा लेते हैं

क्यों बता दिया...इसी शहर से गुजरी हो?

अंतर्मन