मसरुफी

Author: kapil sharma / Labels:

मसरुफी तूने,

इस तरह लाचार कर दिया

इश्क के नाम,

एक दिन कर ,

सारी ज़िन्दगी को

मोहब्बत से

फारिग कर दिया

2 comments:

dr.mahendrag said...

कितना कठिन होता है यह भी करना ,अच्छी रचना

NUKTAA said...

shukriyaa Doctor Saab :)

अंतर्मन