इक बाँवरा सा इंसा था

Author: kapil sharma / Labels:

शौहरत तेरे,
अंदाज़-ए-सुखन की
तुझको हो मुबारक शायर,
मुझे बस इतनी दुआ दो,
के हयात यूँ याद रख ले,
इक बाँवरा सा इंसा था,
बाँवरी बातें करता था

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अंतर्मन