दर्द ठहरता हैं देर तक

Author: kapil sharma / Labels:

दर्द ठहरता हैं देर तक
मगर एक दिन खत्म
हो ही जाता हैं
इसके  निशाँ लेकिन
कुछकर जाते नहीं हैं
बेचिराग घर की तरह
पड़े रहते हैं वहीँ के वहीँ
...एक बार एक चिराग जला दो
...एक बार इस रूह को सुकू मिल जाये
...भटकते भटकते थक गया हूँ

2 comments:

nidhi said...

dard nahi thhahrta par bahut waqt lag jaat h aur wohi manjar wapas samn ata h to tiis markar fir jaag jata h dard.............

NUKTAA said...

:) Beutiful thought Nidhi

अंतर्मन