क्यों करें याद, दीवाना सबको?

Author: kapil sharma / Labels:

मीनारें ये,
ये राजमहल
ढह जाये
बनकर खंडर
एक हकीक़त,
और है छल
ख़ाक इक दिन
हो जाना सब को
अच्छा हैं,
भूल जाना सबको
क्यों करें याद,
दीवाना सबको?
क्या बबूल,
क्या संदल
खा जाये आग,
ये सब जंगल
क्यों बेचैन
फिरें पागल
ख़ाक इक दिन
हो जाना सब को
अच्छा हैं,
भूल जाना सबको
क्यों करें याद,
दीवाना सबको?

2 comments:

Pankaj Battu said...

बहुत बढ़िया साज सज्जा और कंटेंट.

NUKTAA said...

shukriyaa

अंतर्मन