फनकार

Author: kapil sharma / Labels:

बड़े खूबसूरत वो घरोंदे बनाता
बड़े मुहतात से उनको सजाता
हर एक जोड़ पे कितने ख्वाब बसाता
हसरतो के रंग शौक से लगाता

फनकार था यकीनन वो बेहतर, बेहतर
हर नक्श में कैसे जोहर दिखाता
बड़ी दिलकश होती तखलीक उसकी
कई गुल अश्कों के उसपे खिलाता

...वो "ताबुतसाज़"... हैं और रहेगा
आखरी ज़रया-ए-सफर  वही तो बनाता

2 comments:

Artist Ajit said...

Bamaut muze rukhsat karane ko,
kitne aziz au habib hai
Jo sath mere chal paye ab bhi,
itna kaha wo kareeb hai

ek tabut, ek sachcha humsafar
Apne vajud ka dav lagakar
aakhari safar tak sath nibhata.....

Awesome thought dude.....

Manish Kumar said...

behad khoobsurat lagi aapki ye nazm

अंतर्मन