कोई और शह उस बाब सी क्या होगी?

Author: kapil sharma / Labels:

सूरत चाँद की, मेरे महताब सी क्या होगी?
चर्चा उसका रूमानी जितना,
कोई और शह, उस बाब सी क्या होगी?

चैन औ' सुकून नदारद हैं ज़ेहन से
इससे ज्यादा, बामौत, हालत खराब क्या होगी?

महक जो फैली है मेरे घर में इस बार
वहां पर खुशबु-ए-गुलाब क्या होगी?

क्यों पियालों की जरुरत हो अब मुझको,
साक़ी तुझसे बढ़कर शराब क्या होगी?

(बाब= बात)

4 comments:

संजय भास्कर said...

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

संजय भास्कर said...

बहुत ही अच्‍छी कविता लिखी है
आपने काबिलेतारीफ बेहतरीन

Sanjay kumar
HARYANA
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

somyaa said...

Aapki shayari me jo jhalakti hai dil ki baat
aur kisi shayari me wo baat kahan hogi ... :)
Good one!

NUKTAA said...

@ Sanjayji

Bahut Bahut Dhanywaad!!!

@ Somyaa

OWW ye r making me blush

अंतर्मन