तेरी साँसों में दुबका विश्वास

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आसक्ती, मोहबंग, संन्यास
अपूर्ण, खोकला, खुशियों का आभास
थका थका, सारहीन, निरंतर प्रवास
व्यंग करता, क्रूर हँसता, जीवन का उपहास
एक केवल परम सत्य,
क्षण क्षण होता ह्रास
एक केवल परम धेय,
उत्तरजीविता का प्रयास
इकलौता उम्मीद का दीप,
तेरी साँसों में दुबका विश्वास 

क्यों करें याद, दीवाना सबको?

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मीनारें ये,
ये राजमहल
ढह जाये
बनकर खंडर
एक हकीक़त,
और है छल
ख़ाक इक दिन
हो जाना सब को
अच्छा हैं,
भूल जाना सबको
क्यों करें याद,
दीवाना सबको?
क्या बबूल,
क्या संदल
खा जाये आग,
ये सब जंगल
क्यों बेचैन
फिरें पागल
ख़ाक इक दिन
हो जाना सब को
अच्छा हैं,
भूल जाना सबको
क्यों करें याद,
दीवाना सबको?

रूह की कीमतें

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मंदिर हज़ार ||
हज़ार मस्जिदें देख लो ||
खुदा के घर में,  ||
नाखुदा की मल्कियतें देख लो ||
शायद वो इक सौदा, ||
 तुमको भी पेश कर दे ||
चलो बाज़ार "नुक्ता",  ||
रूह की कीमतें देख लो ||

गैर मौजूदगी में तेरी

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यूँ भी हुआ हैं,
गैर मौजूदगी में तेरी
कई सारे ख्वाब तुझसे बाबस्ता
मुझे घेर कर, तेरे बारें में
सवाल करने लगे हैं
पूछते हैं मुझसे
क्या उन आँखों से,
गहरी झील हैं कोई?
क्या उन जुल्फों से,
स्याह रात हैं कोई?
हैं कोई, जाम,
उन लबों से नशीलें
क्या उन धडकनों से,
सुरीली बात हैं कोई?

...अब सोचता हूँ
क्या सचमुच में
जवाब तलाशते हैं
ये खाव्बों ख्याल,
तुमसे जुड़े हुए
या सिर्फ बेकसी पर मेरी
कहकहे लगाने चले आते हैं
गैर मौजूदगी में तेरी


हाँ अगर तू मुस्कराकर कह दे, "बस ऐसा ही है"

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चाँदनी में नहाता,
खुश मिजाज़ साहिल
गुनगुनाती लहरें
बेमालूम सी
बज़्म में शामिल
न रास्ता कोई
ना मंजिल
ना सबब
ना कोई हासिल
बस तू, मैं
और ये कैफियत
ये ज़िन्दगी का ख्वाब, या ख़्वाबों सी ज़िन्दगी हैं
यकीं अपनी खुशफेहमियों पर कर भी लू मैं
हाँ अगर तू मुस्कराकर कह दे, "बस ऐसा ही है"

इत्ती सी नज़्म

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इत्ती सी नज़्म
बहोत सताती हैं मुझे
लफ़्ज़ों से लड़ती हैं
ख्यालों को तोड़ती, मरोड़ती है
खुद अधूरी सी रहकर,
सीने में रोती हैं
जब कभी तेरा नाम,
बिन शुमार किये,
इसे मुकम्मल करने की
कोशीश करता हूँ
इत्ती सी नज़्म
बहोत सताती हैं मुझे

मेरे शहर के रास्ते

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मेरे शहर के रास्ते, 
मुझ जैसे ही पगले, दीवाने
मेरे शहर के रास्ते,
मंजिलों की क्या जाने?
मेरे शहर के रास्ते,
परवाने बिन शम्मा के
मेरे शहर के रास्ते,
लौट कर आना न जाने
मेरे शहर के रास्ते,
बेपरवा क़दमों के कायल
मेरे शहर के रास्ते,
मिजाज़ - ए - अजल
मेरे शहर के रास्ते,
सबके हमराह,
मेरे शहर के रास्ते
मेरी तरह ही गुमराह
मेरे शहर के रास्ते,
मुझ जैसे ही तन्हा

अंतर्मन