इसी में भलाई हैं

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यूँ भी उन्होंने इश्क की तहज़ीब निभाई है
जिक्र पर अपने, उनकी आँखें भर आई है

दरिया को दूर से बस निहारा किये बरसों,
यूँ भी हमने अपनी तश्नगी आजमाई है

कोई दुश्मन से भी इस तरह ना पेश हो
ज़िन्दगी ने हमसे यूँ दोस्ती निभाई  है

इश्क विश्क के फेरे में लाखों हैं बर्बाद हुए,
बाज आ जाओ "नुक्ता", इसी में भलाई हैं

लाठी भी ना टूटे और साँप भी मर जाये

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लाठी भी ना टूटे और साँप भी मर जाये
कुछ सूरत, दर्दे दिल की यूँ निकाली जाये
मंजिलों की  चाह लिए, कितने सफ़र काटे हैं?
चलो रास्तों तुम्हे, तुम्हारे हश्र से मिलवाए
कुछ सूरत, दर्दे दिल की यूँ निकाली जाये
कब तलक ढोएँगे, हम बोझ माज़ियों का
सरे आइना, 'उसको' इक दिन मुआफ किया जाये
कुछ सूरत, दर्दे दिल की यूँ निकाली जाये
बातें बेसिरपैर, खोये खोये से ख्यालात,
बावले नुक्ता, नयी कौनसी तोहमत से
तुझको नवाज़ा जाये?
लाठी भी ना टूटे और साँप भी मर जाये
कुछ सूरत, दर्दे दिल की यूँ निकाली जाये

काला हंस

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एक पुरातन,
महानिर्माण का 
अवशेष मात्र था,
भंगुर क्षणों को चुन चुन रखता
मन तन से भंगित,
श्रापित, त्यागित,  
भिक्षुणी का भिक्षा पात्र था
यायावर था, 
नगर नगर फिरता बादल
सज्जन प्रहरियों
से दुर्लक्षित
"काला हंस" वो,
रचेता के दिवास्वप्न की
छाया मात्र था
विरह व्याकुल,
नवपरिणित रमणी के
मन में जन्मे, 
उन्मादों सा वो भी,
अन्धकार में मुस्कुराता
मधुर पाप था
सज्जन प्रहरियों
से दुर्लक्षित
"काला हंस" वो,
रचेता के दिवास्वप्न की
छाया मात्र था

उस रात जब तुम छोड़ गए थे

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उस रात जब तुम छोड़ गए थे
तन्हा काजल संग  इन आँखों से
बहोत कुछ था जो बह चला था
ख्वाब कई सारे,
जो तुम से बाबस्ता थे

अरमान हज़ारों,
ज़िन्दगी के, वफ़ा के
कितने दिन, कितनी रातें,
किस्से, वादें, कितनी बातें
मेघ सारे, सारे सावन
हर श्रृंगार, पूरा यौवन
सारी वजहें मुस्कुराने की
आहट बेवक्त तुम्हारे आने की
वो सब कुछ जो हम में था
वो सब कुछ जो साथ हमने सोचा था
उस रात जब तुम छोड़ गए थे
तन्हा काजल संग  इन आँखों से
बहोत कुछ था जो बह चला था

चले जाना

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चले जाना, जाने से कौन रुका है?
मंजर जरा संभल जाए,
धड़कन कुछ होश पाए,
ये रूह को जो जिद्द है,
तुम्हारे साथ हो लेने की
थोड़ी देर बहल जाए
चले जाना, जाने से कौन रुका है?
मंजर जरा संभल जाए
थोडा रंग पकड़ ले,
ये मौसम, माहताब, हवाएं
कुछ तारें अश्क पोंछ ले,
कुछ मिजाज़ रात का बदल जाए
चले जाना, जाने से कौन रुका है?
मंजर जरा संभल जाए.

कुछ त्रिवेणियाँ

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शराब हो, तुम हो, रूमानी सा समाँ  हो
तेरी ग़ज़लों की किताब से महफ़िल यूँ जवाँ  हो

मुद्दत हो गयी, "अज्जू", हमें साथ बैठे।।

***

जाने कितने जाम उतारे, उसने भी और मैंने भी
कितने रचे फलक पे चाँद सितारे, उसने भी और मैंने भी

कमाल है, तेरी गैरमौजूदगी , साकी भी और शायर भी
 

***

धड़कन धड़कन ढूंढा है, रेझा रेझा तलाशा
अब बस साथ है तेरा चेहरा धुन्दला सा

उस रोज़ दिल के साथ और बहोत कुछ टुटा था

***

धड़कन धड़कन ढूंढा है, रेझा रेझा तलाशा
अब बस साथ है तेरा चेहरा धुन्दला सा

उस रोज़ दिल के साथ और बहोत कुछ टुटा था

***

अजब नस्लें आबाद हैं, खुदा तेरे जहान में
शेखचिल्ली मस्त हैं, न जाने किस गुमान में

शाख दीवानी, कंपकपाती हैं, इनके नीचे

***

दिल भी भर आएगा, आँख आंसू भी छलकाएगी
बेमौसम, सेहरा पर मेघा अपनी जुल्फें लहराएगी

धुंधली भले हो जाये यादें, पिछा कहाँ छोडती है?

भले लाख जुस्तजू लिए

Author: Kapil Sharma / Labels:

भले लाख जुस्तजू लिए मेरी नज़र रहे
दिल तुम्हारा बेअसर था बेअसर रहे
क्या और इन्तहा हो, इश्क की,

इश्क था, इश्क हैं, और इश्क अगर रहे?
कौन दीवाना अब मंजिल की तलब रखे?
रास्ता चलता रहे, तू हमसफ़र रहे

सुना सुना जैसा भी, 
दश्त तो "नुक्ता" अपना है
लाख रंगीनियाँ लिए मुबारक, 
आपको अपना शहर रहे

अंतर्मन